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मोरल स्टोरी

असफलता ही सफलता दिलाती है : Edison , Abraham Linclon,Sandeep Maheswari Ki Saflta Ka Raj

असफलता ही सफलता दिलाती है : Edison , Abraham Linclon,Sandeep Maheswari Ki Saflta Ka Raj

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती सफलता की सारी कहानियो के साथ महान असफलताओ की कहानिया भी जुडी हुई है । फर्क केवल इतना था कि हर असफलता के बाद वे जोश के साथ फिर उठ खड़े हुए । इसे पीछे धकेलने वाली नहीं , बल्कि आगे बढ़ाने वाली नाकामयाबी कहते है । हम सीखते हुई आगे बढ़ते है । हम अपनी असफलताओ से सबक लेते हुई आगे बढ़ते है | सन 1914 उस समय उनकी उम्र 67 साल थी Edison जबान नहीं रह गए थे और फैक्टरी का बीमा भी को थोड़े पैसों का था इसके बावजूद वह अपनी जिंदगी भर की मेहनत का धुआं बनकर उड़ते हुए देख कर उन्होंने कहा या बर्बादी बहुत कीमती है हमारी सारी गलतियां जलकर राख हो गई हैं मेरे सर को धंयवाद देता हूं कि उसने हमें नई शुरुआत करने का
आत्महत्या : प्रेरक कहानी | Suicide : A Story For Upset Students [ Motivational ]

आत्महत्या : प्रेरक कहानी | Suicide : A Story For Upset Students [ Motivational ]

एक 15 साल का नवजवान था, जो कि परीक्षा मे fail हो गया था,और घरवालो के डांटे जाने से बहुत ही ज्यादा परेशान था । fail होने की वजह से बाहर पड़ोसियों के ताने, दोस्तो द्वारा उसका मज़ाक बनाये जाने को सोचकर उसकी परेशानियां इतनी बढ़ गयी कि उसे लगा कि शायद उसे इस दिन मे नही रहना चाहिए, उसका इस संसार मे कोई नही । आत्महत्या के लिए उसे सबसे अच्छा साधन फांसी लगाना लगा। क्योंकि घर पर पेशे वाले और सब घर से बाहर अपने पेशे से बाहर निकल गए थे । उसे लगा यह एक पर्याप्त समय रहेगा सब को छोड़ कर जाने का । कुछ ऐसा हुआ कि उसने प्रण किया अब उसे इस संसार को अलविदा कहना ही चाहिए । उसने रस्सी बांधी और जैसे ही उसने छत पर देखा तो छत ने उससे कहा - ऊंचे उद्देश् रखो ,यही उच्चे उद्देश् तुम्हे और ऊपर ले जाएंगे ,लेकिन वह लड़का न माना और उसने रस्सी ली और अपने पंखे पर जैसे ही डालता है पंखा उससे कहता है - ठंडे से रहो ,और आगे बढ़ने के प
प्रेरणादायी कहानी – मेढ़को की दौड़ प्रतियोगिता | Frogs Race Competition

प्रेरणादायी कहानी – मेढ़को की दौड़ प्रतियोगिता | Frogs Race Competition

    मेढ़को की दौड़ प्रतियोगिता | Frogs Race Competition एक बार की बात है ,एक नगर मे एक सरोवर था जिसके बीचोबीच उस नगर के राजा ने एक ऊंचा सा खम्भा लगवाया था । उस सरोवर मे ही ढ़ेर सारे मेढक रहते थे ,एक दिन मेढ़को के दिमाग मे आया क्यो न एक race करायी जाय जिसमे जो मेढक इस खम्भे पर सबसे ऊपर तक सबसे पहले चढ़ जायेगा वही विजेता माना जायेगा। Race की तैयारी जोरो शोरो से शुरू हुई , बहुत सारे पशु पक्षी भी बुलाये गए । आखिर Race का दिन आ ही गया । आसपास के इलाकों से भी बहुत सारे मेढक दौड़ प्रतियोगिता मे भाग लेने के लिए आये। race start हुई लेकिन खम्भे को देखकर भीड़ मे एकत्र हुए मेढ़को को यह लग रहा था कि उनके लिए इस पर चढ़ना असंभव जैसा है ।हर तरफ से लोग यही कह रहे थे अरे यह बहुत कठिन है ,देखो तो यह खंभा कितना ऊंचा है ,वे कभी भी यह Race पूरी नही कर पाएंगे ।सफलता का कोई सवाल ही नही इतने उच्चे खम्भे पर तो चढ़ा ही नही जा
सफलता की कुंजी| आत्मविश्वास | Motivational Story

सफलता की कुंजी| आत्मविश्वास | Motivational Story

life में बोहुत बार ऐसा होता है जो कुछ हम करतें हैं अगर सफ़ल हुयें तो credit खुद पर लेतें हैं किंतु जब हम किसी चीस में असफ़ल होतें हैं तो उसको कारण दूसरों पर दाल देतें हैं| और सोचतें हैं की फलाने इंसान की वजह से ये हुवा या फिर कुछ रिश्तेदार की वजह से हुवा या फिर कोई भी ऐसा कारण दूंध लेतें हैं जिससे हम अपने आप पर खुद की असफ़ल का कारन बना सकें... पर असल में हमारी सफ़लता या फिर हमारी असफ़लता का सबसे बड़ा कारण हम ख़ुद होतें हैं दोस्तों चलिए आज एक ऐसी कहानी आपके साथ शेर करतें हैं जो आपको निराशा से सफलता तक ले जाएगी.. आपकी असफलता अच्छा शिक्षक हैं | Failure is The Best Teacher निराशा से सफलता तक ले जाने वाली कहानी एक कम्पनी के मालिक ने देखा कि उसकी कम्पनी के सारे कर्मचारी बड़े ही निराश और दुःखी जैसे दिखते थे। उनके अंदर आत्मविश्वास और ऊर्जा जैसे खत्म हो चुकी थी। कम्पनी के मालिक ने उन लोगों को फिर से न
इंसानियत – शिक्षाप्रद कहानी

इंसानियत – शिक्षाप्रद कहानी

क्या खूब कहा हैं किसी ने "जरुरी नहीं जिसमें सांसे नहीं वोही मुर्दा हैं , जिसमे इंसानियत नहीं वो भी तो मुर्दा ही हैं" friends इस दुनिया में सबसे बड़ा हथियार सा सबसे बड़ी ताकत हैं तो इंसानियत सबसे अहम् चीस हैं तो वोहे इंसानियत, अगर आप कोई बुरा काम कर रहें है और सोचते है की आपको कोई नहीं देख रहा पर इतना याद रखिये आप खुद तो उसे देख रहें है न ऊपर वाला आपको देख रहा हैं और यही सोच कर आप उस बुरें काम को तुरंत छोड़ देतें हैं तो यही होती है इंसानियत किसी वस्तु किसी ज़िव के प्रति प्यार दिखाना उसको समजना यही तो हैं इंसानियत ,friends आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी कहने जा रहें हैं जो साबित करती हैं "इंसान तो हर घर में पैदा होते हैं पर इंसानियत कही-कही जन्म लेती हैं" इंसानियत एक समय की बात है एक छोटा सा गाँव था जहाँ के लोग रोजमर्रा के कामों व अपने शांत वातावरण में खुश रहते थे| उसी गाँव से कुछ दूरी पर एक आश्रम
सबसे कीमती और बेकार अंग : अकबर – बीरबल | Akbar Birbal Story In Hindi

सबसे कीमती और बेकार अंग : अकबर – बीरबल | Akbar Birbal Story In Hindi

एक बार राजा अकबर अपने दरबार मंत्रियो के साथ बैठे थे |अचानक उन्होंने सैनिक से कहा- एक बकरे को दरबार में पेश किया जाय | सैनिक बकरे को दरबार में लेकर आये | राजा अकबर ने मंत्री बीरबल से कहा कि – “मंत्री बीरबल ! इस बकरे का सबसे अच्छा अंग काट कर लाओ |” बीरबल मुस्कुराए और कुछ देर के बाद एक प्लेट में बकरे की जीभ को काट कर राजा अकबर के सामने पेश करते हुए बोले – हुजुर , बकरे के शरीर में जीभ ही सबसे अच्छा अंग है | अकबर ने पुनः बीरबल से कहा – बीरबल इस बार तुम बकरे का सबसे बेकार अंग काट कर लाओ |बीरबल ने पुनः राजा अकबर के सामने बकरे की जीभ को प्रस्तुत करते हुए कहा – महाराज बकरे के शरीर में सबसे बेकार अंग जबान ही है |अकबर ने कहा – “बीरबल जब मैंने तुमसे बकरे के शरीर में सबसे अच्छा अंग लाने को कहा तब भी तुम जीभ ही लाये फिर मैंने तुमसे बकरे का सबसे बेकार अंग प्रदर्शित करने को कहा तब भी तुम जीभ ही काट कर लाय
माँ-बेटी के बच्चों में क्या रिश्ता हुआ? चौबीसवीं कहानी!!|विक्रम – बैताल Hindi Story

माँ-बेटी के बच्चों में क्या रिश्ता हुआ? चौबीसवीं कहानी!!|विक्रम – बैताल Hindi Story

माँ-बेटी के बच्चों में क्या रिश्ता हुआ? किसी नगर में मांडलिक नाम का राजा राज करता था। उसकी पत्नी का नाम चडवती था। वह मालव देश के राजा की लड़की थी। उसके लावण्यवती नाम की एक कन्या थी। जब वह विवाह के योग्य हुई तो राजा के भाई-बन्धुओं ने उसका राज्य छीन लिया और उसे देश-निकाला दे दिया। राजा रानी और कन्या को साथ लेकर मालव देश को चल दिया। रात को वे एक वन में ठहरे। पहले दिन चलकर भीलों की नगरी में पहुँचे। राजा ने रानी और बेटी से कहा कि तुम लोग वन में छिप जाओ, नहीं तो भील तुम्हें परेशान करेंगे। वे दोनों वन में चली गयीं। इसके बाद भीलों ने राजा पर हमला किया। राजा ने मुकाबला किया, पर अन्त में वह मारा गया। भील चले गये। उसके जाने पर रानी और बेटी जंगल से निकलकर आयीं और राजा को मरा देखकर बड़ी दु:खी हुईं। वे दोनों शोक करती हुईं एक तालाब के किनारे पहुँची। उसी समय वहाँ चंडसिंह नाम का साहूकार अपने लड़के के साथ,