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Devotional

गणेश चतुर्थी : शायरी , बधाई सन्देश | Ganesh Chaturthi : Shayri , SMS in Hindi

गणेश चतुर्थी : शायरी , बधाई सन्देश | Ganesh Chaturthi : Shayri , SMS in Hindi

गणेश जी आपको नूर दे, खुशियाँ आपको संपूर्ण दे, आप जाए गणेश जी के दर्शन को ओर गंश जी आपको सुख संपति भरपूर दे… Happy Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाये |   आपका सुख गणेश के पेट जितना बड़ा हो, आपका दुःख उदर जैसा छोटा हो, आपका जीवन गणेश जी की सूंड जितना बड़ा हो, आपके बोल मोदक जैसे मीठे हो। Happy Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाये |   भक्ति गणेशाया,शक्ति गणेशाया, आपकी ज़िंदगी मेी आए गणेशाया खुशियाँ अपने साथ लाए गणेशाया. Happy Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाये |   खुशियो की सौगात आए, गणेश जी आपके पास आए, आपके जीवन मे आए सुख संपाति की बाहर जो गणेश जी अपने साथ लाए. Happy Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाये |   चलो खुशियो का जाम हो जाए, लेके बप्पा का नाम कुछ आचे काम हो जाए, खुशिया बाँट
विष्णु चालीसा | Vishnu Chalisa [Hindi]

विष्णु चालीसा | Vishnu Chalisa [Hindi]

 || दोहा || विषणु सुनिए विनय सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करुँ दीजै ज्ञान बताय॥ नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी। प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी। सुन्दर रुप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत। तन पर पिताम्बर अति सोहत, बैजन्ति माला मन मोहत। शंख चक्र मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे। संतभक्त सज्जन मरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन। सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिताय करत जन सज्जन। पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण। करत अनेक रुप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण। धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रुप राम का धारा। भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा। आप बाराह रुप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया। धर मतस्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया। अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रुप मोहनी आप दिखाया। देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहल
लक्ष्मी चालीसा | Lakshmi Chalisa [Hindi]

लक्ष्मी चालीसा | Lakshmi Chalisa [Hindi]

     लक्ष्मी चालीसा | Lakshmi Chalisa [Hindi] ॥ दोहा॥ मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥ ॥ सोरठा॥ यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं। सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥ ॥ चौपाई ॥ सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही ॥ तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥ जय जय जगत जननि जगदम्बा। सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥1॥ तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥ जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥2॥ विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥ केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥3॥ कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥ ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥4॥ क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥ चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बन
शिव चालीसा | Shiv Chalisa [ Hindi ]

शिव चालीसा | Shiv Chalisa [ Hindi ]

शिव चालीसा | Shiv Chalisa [ Hindi ] ।।दोहा।। श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥1॥ मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥2॥ देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥ किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥ तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥ आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥3॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥ किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प
हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa [ Hindi ]

हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa [ Hindi ]

॥दोहा॥     श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥ ॥चौपाई॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।  जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥        राम दूत अतुलित बल धामा । अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥ महाबीर बिक्रम बजरङ्गी । कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥ कञ्चन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥ सङ्कर सुवन केसरीनन्दन । तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥७॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥ लाय सञ्जीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥
श्री साईं चालीसा | Sai Chalisa Chalisa [ Hindi ]

श्री साईं चालीसा | Sai Chalisa Chalisa [ Hindi ]

श्री साईं चालीसा | Sai Chalisa Chalisa [ Hindi ] श्री साँई के चरणों में, अपना शीश नवाऊं मैंकैसे शिरडी साँई आए, सारा हाल सुनाऊ मैं कौन है माता, पिता कौन है, यह न किसी ने भी जाना। कहां जन्म साँई ने धारा, प्रश्न पहेली रहा बना कोई कहे अयोध्या के, ये रामचन्द्र भगवान हैं। कोई कहता साँई बाबा, पवन-पुत्र हनुमान हैं कोई कहता मंगल मूर्ति, श्री गजानन हैं साँई। कोई कहता गोकुल-मोहन, देवकी नन्द्न हैं साँई शंकर समझ भक्त कई तो, बाबा को भजते रहते। कोई कह अवतार दत्त का, पूजा साँई की करते कुछ भी मानो उनको तुम, पर साँई हैं सच्चे भगवान। बड़े दयालु, दीनबन्धु, कितनों को दिया जीवनदान कई बरस पहले की घटना, तुम्हें सुनाऊंगा मैं बात। किसी भाग्यशाली की शिरडी में, आई थी बारात आया साथ उसी के था, बालक एक बहुत सुनदर। आया, आकर वहीं बद गया, पावन शिरडी किया नगर कई दिनों तक रहा भटकता, भिक्षा मांगी उसने दर-दर। और दिखाई ऎसी लीला,
माँ संतोषी चालीसा | Maa Santoshi Chalisa [ Hindi ]

माँ संतोषी चालीसा | Maa Santoshi Chalisa [ Hindi ]

दोहा बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार। ध्यान धरत ही होत नर दुःख सागर से पार॥ भक्तन को सन्तोष दे सन्तोषी तव नाम। कृपा करहु जगदम्ब अब आया तेरे धाम॥ चालीसा जय सन्तोषी मात अनूपम। शान्ति दायिनी रूप मनोरम॥ सुन्दर वरण चतुर्भुज रूपा। वेश मनोहर ललित अनुपा॥1॥ श्‍वेताम्बर रूप मनहारी। माँ तुम्हारी छवि जग से न्यारी॥ दिव्य स्वरूपा आयत लोचन। दर्शन से हो संकट मोचन॥2॥ जय गणेश की सुता भवानी। रिद्धि- सिद्धि की पुत्री ज्ञानी॥ अगम अगोचर तुम्हरी माया। सब पर करो कृपा की छाया॥3॥ नाम अनेक तुम्हारे माता। अखिल विश्‍व है तुमको ध्याता॥ तुमने रूप अनेकों धारे। को कहि सके चरित्र तुम्हारे॥4॥ धाम अनेक कहाँ तक कहिये। सुमिरन तब करके सुख लहिये॥ विन्ध्याचल में विन्ध्यवासिनी। कोटेश्वर सरस्वती सुहासिनी॥ कलकत्ते में तू ही काली। दुष्‍ट नाशिनी महाकराली॥ सम्बल पुर बहुचरा कहाती। भक्तजनों का दुःख मिटाती॥5॥ ज्वाला जी में ज्वाला