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सॉर्ट स्टोरी

आत्महत्या : प्रेरक कहानी | Suicide : A Story For Upset Students [ Motivational ]

आत्महत्या : प्रेरक कहानी | Suicide : A Story For Upset Students [ Motivational ]

एक 15 साल का नवजवान था, जो कि परीक्षा मे fail हो गया था,और घरवालो के डांटे जाने से बहुत ही ज्यादा परेशान था । fail होने की वजह से बाहर पड़ोसियों के ताने, दोस्तो द्वारा उसका मज़ाक बनाये जाने को सोचकर उसकी परेशानियां इतनी बढ़ गयी कि उसे लगा कि शायद उसे इस दिन मे नही रहना चाहिए, उसका इस संसार मे कोई नही । आत्महत्या के लिए उसे सबसे अच्छा साधन फांसी लगाना लगा। क्योंकि घर पर पेशे वाले और सब घर से बाहर अपने पेशे से बाहर निकल गए थे । उसे लगा यह एक पर्याप्त समय रहेगा सब को छोड़ कर जाने का । कुछ ऐसा हुआ कि उसने प्रण किया अब उसे इस संसार को अलविदा कहना ही चाहिए । उसने रस्सी बांधी और जैसे ही उसने छत पर देखा तो छत ने उससे कहा - ऊंचे उद्देश् रखो ,यही उच्चे उद्देश् तुम्हे और ऊपर ले जाएंगे ,लेकिन वह लड़का न माना और उसने रस्सी ली और अपने पंखे पर जैसे ही डालता है पंखा उससे कहता है - ठंडे से रहो ,और आगे बढ़ने के प
प्रेरणादायी कहानी – मेढ़को की दौड़ प्रतियोगिता | Frogs Race Competition

प्रेरणादायी कहानी – मेढ़को की दौड़ प्रतियोगिता | Frogs Race Competition

    मेढ़को की दौड़ प्रतियोगिता | Frogs Race Competition एक बार की बात है ,एक नगर मे एक सरोवर था जिसके बीचोबीच उस नगर के राजा ने एक ऊंचा सा खम्भा लगवाया था । उस सरोवर मे ही ढ़ेर सारे मेढक रहते थे ,एक दिन मेढ़को के दिमाग मे आया क्यो न एक race करायी जाय जिसमे जो मेढक इस खम्भे पर सबसे ऊपर तक सबसे पहले चढ़ जायेगा वही विजेता माना जायेगा। Race की तैयारी जोरो शोरो से शुरू हुई , बहुत सारे पशु पक्षी भी बुलाये गए । आखिर Race का दिन आ ही गया । आसपास के इलाकों से भी बहुत सारे मेढक दौड़ प्रतियोगिता मे भाग लेने के लिए आये। race start हुई लेकिन खम्भे को देखकर भीड़ मे एकत्र हुए मेढ़को को यह लग रहा था कि उनके लिए इस पर चढ़ना असंभव जैसा है ।हर तरफ से लोग यही कह रहे थे अरे यह बहुत कठिन है ,देखो तो यह खंभा कितना ऊंचा है ,वे कभी भी यह Race पूरी नही कर पाएंगे ।सफलता का कोई सवाल ही नही इतने उच्चे खम्भे पर तो चढ़ा ही नही जा
पत्थर, कंकड़ और रेत | inspirational story Hindi

पत्थर, कंकड़ और रेत | inspirational story Hindi

पत्थर, कंकड़ और रेत Philosophy के एक professor ने कुछ चीजों के साथ class में प्रवेश किया. जब class शुरू हुई तो उन्होंने एक बड़ा सा खाली शीशे का जार लिया और उसमे पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े भरने लगे. फिर उन्होंने students से पूछा कि क्या जार भर गया है ? और सभी ने कहा “हाँ”. तब प्रोफ़ेसर ने छोटे-छोटे कंकडों से भरा एक box लिया और उन्हें जार में भरने लगे. जार को थोडा हिलाने पर ये कंकड़ पत्थरों के बीच settle हो गए. एक बार फिर उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या जार भर गया है?  और सभी ने हाँ में उत्तर दिया. तभी professor ने एक sand box निकाला और उसमे भरी रेत को जार में डालने लगे. रेत ने बची-खुची जगह भी भर दी. और एक बार फिर उन्होंने पूछा कि क्या जार भर गया है? और सभी ने एक साथ उत्तर दिया , ” हाँ” फिर professor ने समझाना शुरू किया, ” मैं चाहता हूँ कि आप इस बात को समझें कि ये जार आपकी life को represent
परिश्रम का फल | Result Of Hardwork – Inspiring Story Hindi

परिश्रम का फल | Result Of Hardwork – Inspiring Story Hindi

दोस्तों आज की कहानी आपको यह बताएगी कि – परिश्रम करने से सफलता जरुर मिलती है , कई ऐसे उद्यमी , मेहनती लोग हुए हैं जिन्होंने कठिन से कठिन काम को भी बड़ी समझदारी और लगन से किया और आज वे इसी के लिए याद किये जाते हैं | बिहार के मांझी , जिन्होंने केवल अपनी पत्नी के पहाड़ पर फिसलने से हुई मृत्यु के कारण पहाड़ जैसी मुश्किल चीज को कटाने का प्रयास किया , जिसे कई वर्षो से सरकार हटाने से घबरा रही थी उसे एक व्यक्ति ने 22 वर्षो तक लगातार मेहनत करके हटा दिया |चलिए पढ़ते है अब कहानी - एक बार एक राज्य में भयंकर सूखा पड़ गया | सभी पेड़ पौधे तथा वनस्पति सूख कर नष्ट हो गयी | उसी राज्य के सभी किसान निरास हो गये और खेती छोड़कर आजीविका (नौकरी) के लिए इधर उधर भटकने लगे | उसी राज्य में एक गाँव में एक किसान अपने काम की धुन का पक्का था , जो प्रतिदिन नियमित खेत पर जाकर बैलो द्वारा खेत जोतता था | गाँव के किसान उसे मना करते
सबसे कीमती और बेकार अंग : अकबर – बीरबल | Akbar Birbal Story In Hindi

सबसे कीमती और बेकार अंग : अकबर – बीरबल | Akbar Birbal Story In Hindi

एक बार राजा अकबर अपने दरबार मंत्रियो के साथ बैठे थे |अचानक उन्होंने सैनिक से कहा- एक बकरे को दरबार में पेश किया जाय | सैनिक बकरे को दरबार में लेकर आये | राजा अकबर ने मंत्री बीरबल से कहा कि – “मंत्री बीरबल ! इस बकरे का सबसे अच्छा अंग काट कर लाओ |” बीरबल मुस्कुराए और कुछ देर के बाद एक प्लेट में बकरे की जीभ को काट कर राजा अकबर के सामने पेश करते हुए बोले – हुजुर , बकरे के शरीर में जीभ ही सबसे अच्छा अंग है | अकबर ने पुनः बीरबल से कहा – बीरबल इस बार तुम बकरे का सबसे बेकार अंग काट कर लाओ |बीरबल ने पुनः राजा अकबर के सामने बकरे की जीभ को प्रस्तुत करते हुए कहा – महाराज बकरे के शरीर में सबसे बेकार अंग जबान ही है |अकबर ने कहा – “बीरबल जब मैंने तुमसे बकरे के शरीर में सबसे अच्छा अंग लाने को कहा तब भी तुम जीभ ही लाये फिर मैंने तुमसे बकरे का सबसे बेकार अंग प्रदर्शित करने को कहा तब भी तुम जीभ ही काट कर लाय
संगति का असर : Effect of Constansy |Inspiring Story In Hindi

संगति का असर : Effect of Constansy |Inspiring Story In Hindi

बात उस समय की है जब राजा विक्रमादित्य उज्जैन के राजा थे | राजा विक्रमादित्य न्यायपालक न्यायप्रिय राजा थे |उन्होंने अपने राज्य में यह एलान करा रखा था कि – राज्य की बाजार में शाम तक जिस व्यक्ति का कोई भी सामन नहीं बिकेगा उस सामन को राजा , मंत्री और सैनिक जाकर उस वस्तु का उचित मूल्य देकर खरीद लेंगे जिससे उस व्यक्ति का धनाभाव के कारण कोई कार्य बाधित न हो | एक बार राजा विक्रमादित्य के राज्य को बाजार में एक बहेलिया दो तोते बेचने आया | उसने तोते एक तोते का मूल्य पांच रूपये और दुसरे तोते का 50 रूपये बताया , दोनों तोते का रंग रूप आकर देखने में एक जैसा ही था , देखने में दोनों एक जैसे लगते थे |कई व्यक्तियों ने तोते वाले बहेलियो को ठग मानकर शाम तक किसी ने भी उसका तोता किसी ने नहीं खरीदा | शाम को जब राजा के मंत्री व सैनिक एक एक कर व्यक्तियों के बचे सामान को खरीद रहे थे , तभी वे उस बहेलिये के पास भी पहु
चालक लोमड़ी : Clever Fox | Moral Story In Hindi

चालक लोमड़ी : Clever Fox | Moral Story In Hindi

हेलो , दोस्तों , आप सबका Help हिंदी में आपका स्वागत है | आज की कहानी काफी ही शिक्षाप्रद है – चालक लोमड़ी एक बार की बात है , एक कौवा था जो बहुत भूखा था | भोजन प्राप्त करने के लिए वह इधर – उधर घूम रहा था | कि अचानक उसे रोटी दिखाई पड़ी , कौवे ने रोटी उठाई और एक पेड़ की शाखा के ऊपर बैठ गया | और रोटी खाने के लिए विचार करने लगा | तब एक लोमड़ी ने कौवे और रोटी को देखा | रोटी को देखते है लोमड़ी रोटी को पाने की सोचने लगा | लोमड़ी उस पेड के नीचे बैठ गया जिसके ऊपर कौवा बैठा था | लोमड़ी ने कौए से कहा – अरे प्यारे कौवे ! तुम बहुत सुंदर हो , तुम्हारा शरीर अति मनोहरी है | तुम्हारे पंख मन को हरने वाले हैं | तुम्हारी आवाज बहुत ही मीठी है | तुम्हारी आवाज सुनकर मेरे कान तृप्त हो जाते हैं ,मन आनंदमय हो जाता है | अपनी प्रशंसा सुनकर कौवा बहुत ही खुश हो गया | और अपनी और अधिक प्रशंसा सुनने के चक्कर में उसने सोचा क्यों