पुराने स्‍मोकर्स नॉन-स्‍मोकर्स युवाओं की तुलना में अधिक जीते हैं|

जानें क्‍यों नॉन-स्‍मोकर्स युवाओं की तुलना में अधिक जीते हैं पुराने स्‍मोकर्स

Note:- यह आर्टिकल किसी भी चीस या किसी भी तरह के हानिकारक पदार्थोँ का उपयोग करनें का बढावा देने के लिए नहीं लिखी गई, यही सिर्फ एक Interesting जानकारी के रूप में सभी पाठकों के लिए लिखी गई हैं |

धूम्रपान करना खतरनाक होता है, यह सभी जानते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं पुराने स्‍मोकर्स युवा नॉन-स्‍मोकर्स की तुलना में अधिक जीते हैं, इसके लिए कही कारण हो सकतें हैं यहाँ हमने कुच ऐसे interesting पॉइंट निकालें हैं जिसें पढने के बाद आप यह समज जायेंगे की नॉन-स्‍

मोकर्स युवाओं की तुलना में अधिक क्यों जीते हैं पुराने स्‍मोकर्स ।

Top 5 Reasons 

1. स्मोकर्स और नॉन-स्मोकर्स

जानें क्‍यों नॉन-स्‍मोकर्स युवाओं की तुलना में अधिक जीते हैं पुराने स्‍मोकर्स
जानें क्‍यों नॉन-स्‍मोकर्स युवाओं की तुलना में अधिक जीते हैं पुराने स्‍मोकर्स

स्मोक करने से कैंसर हो जाएगा, हार्ट-अटैक से मर जाओगे, उम्र घट जाएगी… आदि कई बातें सिगरेट पीने वालों को सुनाई जाती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। हाल ही में किए गए कई शोधों से पता चला है कि स्मोकिंग न करने वालों की तुलना में स्मोक करने वाले लोग अधिक जीते हैं और टेंशन फ्री रहते हैं। मतलब की स्मोकिंग के भी अपने फायदे हैं। वैसे ज्यादा लोग स्मोकिंग् इसी लिए करतें हैं की वो किसी चिंता में होतें हैं या फिर कई लोग ऐसे भी होते है जो सोख रखतें है स्मोकिंग का  लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हर कोई स्मोक करने लगे। इसका फायदा तभी होता है जब आपका शरीर ध्रुमपान की आदत को झेलने लग जाता है।

2. नॉन-स्मोकर्स मं लंग कैंसर का खतरा ज्यादा

नॉन-स्मोकर्स मं लंग कैंसर का खतरा ज्यादा
नॉन-स्मोकर्स मं लंग कैंसर का खतरा ज्यादा

फ्रांस के जनरल हॉस्पीटल रेस्पीरेटरी फीजिशियन रिसर्च के अनुसार पिछले कुछ सालों से स्मोकर्स की तुलना में स्मोक नहीं करने वाले और महिलाओं में लंग कैंसर के खतरे बढ़े हैं। 2000 में 7.9 प्रतिशत नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर पाया गया था जो अब बढ़कर 11.9 प्रतिशत हो गया है। जबकि 16 प्रतिशत महिलाओं से बढ़कर 24.4 प्रतिशत महिलाओं में लंग कैंसर पाया गया है। यानि यह साबित हो चूका हैं की जो लोग स्मोकिंग करते हैं उनको लंग  कैंसर नहीं होता जोकि नुकसान तो होता ही हैं पर यह जरुरी नहीं है हमारें लिए की हम बोहुत साडी बिमारिय हमारें शरीर में आने दें..

3. दिल की दवा को बेहतर बनाने में मदद

दिल की दवा को बेहतर बनाने में मदद
दिल की दवा को बेहतर बनाने में मदद

कोरियन रिसर्च, जो कि 2009 में प्रकाशित हार्वर्ड के शोध पर आधारित है, के अनुसार एक दिन में कम से कम 10 सिगरेट पीना फायदेमंद होता है। सिगरेट का धुंआ शरीर के अंदर के प्रोटीन को एक्टिवेट कर देता है जिसे साइटोक्रोम्स कहते हैं जो कि क्लोपीडोगरल में परिवर्तित हो जाती है। क्लोपीडोगरल दिल की एक दवा है।

4. घुटनों की री-प्लेसमेंट सर्जरी का खतरा होता है कम

घुटनों की री-प्लेसमेंट सर्जरी का खतरा होता है कम
घुटनों की री-प्लेसमेंट सर्जरी का खतरा होता है कम

आस्ट्रेलिया के एडिलेड यूवर्सिटी के अनुसार स्मोकर्स की तुलना में नॉन-स्मोकर्स को घुटनों की री-प्लेसमेंट सर्जरी का अधिक खतरा होता है। स्टडी के अनुसार घुटनों और जोड़ों की दर्द की समस्या सुबह-सुबह दौड़ने वालों और परेशान रहने वालों में अधिक होती है। जबकि देखा गया है कि स्मोकर्स कम दौड़ते हैं और तनाव में भी कम रहते हैं जिन कारण इनमें जोड़ों की समस्या नहीं होती।

5. पार्किंसन का रोग स्मोकर्स को नहीं होता

पार्किंसन का रोग स्मोकर्स को नहीं होता
पार्किंसन का रोग स्मोकर्स को नहीं होता

जर्नल न्यूरॉली के अध्ययन के अनुसार जो स्मोक करते हैं उनमें पार्किंसंस रोग का खतरा ना के बराबर होता है। खासकर तो जो लंबे समय से स्मोक कर रहे हैं उनका शरीर में पार्किंसंस रोग के खिलाफ अच्छी तरह से लड़ पाता है। 2007 में न्यूरॉलॉजी में छपी हार्वर्ड के रिसर्च के अनुसार भी यह माना गया था कि स्मोक करने वाले में पार्किंसन रोग ना के बराबर मिलते हैं।

यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए मेरे helpहिन्दी के पाठको के लिए दोस्तों किसी भी चीस का उपयोग एक हद तक ही करना चाहियें नहीं उसे हमारी जरूरत बना लेनी चाहिए नहीं मजबूरी बनानी चाहियें किसी भी तरह का नशा करना आपके शरीर और आपकी हेल्थ को नुकशान करता हैं तो दोस्तों ऐसी सभी चीसों से दूर रहियें और अपने दोस्तों को भी दूर रखिये अगर आपको एक अच्छी दुनिया चाहिए तो आपको खुद पहले बदलना होगा फिर देखिये दुनिया कैसे अपने आप बदल जाएगी….

धन्यवाद

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