चाणक्य नीति | पांचवा अध्याय | Chanakya Neeti [ हिंदी में ]

4
95

Chanakya Neeti : fifth Chapter [In Hindi]

चाणक्य नीति 1 : ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए . दुसरे लोगों को ब्राह्मण की पूजा करनी चाहिए . पत्नी को  पति की पूजा करनी चाहिए तथा  दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आये उसकी सभी को पूजा करनी चाहिए .

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 2 : सोने की परख उसे घिस कर, काट कर, गरम कर के और पीट कर की जाती है. उसी तरह व्यक्ति का परीक्षण वह कितना त्याग करता है, उसका आचरण कैसा है, उसमे गुण कौनसे है और उसका व्यवहार कैसा है इससे होता है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 3 : यदि आप पर मुसीबत आती नहीं है तो उससे सावधान रहे. लेकिन यदि मुसीबत आ जाती है तो किसी भी तरह उससे छुटकारा पाए.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 4 :  अनेक व्यक्ति जो एक ही गर्भ से पैदा हुए है या एक ही नक्षत्र में पैदा हुए है वे एकसे नहीं रहते. उसी प्रकार जैसे बेर के झाड के सभी बेर एक से नहीं रहते.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 5 : वह व्यक्ति जिसके हाथ स्वच्छ है कार्यालय में काम नहीं करना चाहता.

जिस ने अपनी कामना को ख़तम कर दिया है, वह शारीरिक शृंगार नहीं करता, जो आधा पढ़ा हुआ व्यक्ति है वो मीठे बोल बोल नहीं सकता. जो सीधी बात करता है वह धोका नहीं दे सकता.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 6 : मूढ़ लोग बुद्धिमानो से इर्ष्या करते है. गलत मार्ग पर चलने वाली औरत पवित्र स्त्री से इर्ष्या करती है. बदसूरत औरत खुबसूरत औरत से इर्ष्या करती है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 7 : खाली बैठने से अभ्यास का नाश होता है. दुसरो को देखभाल करने के लिए देने से पैसा नष्ट होता है. गलत ढंग से बुवाई करने वाला किसान अपने बीजो का नाश करता है. यदि सेनापति नहीं है तो सेना का नाश होता है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 8 : अर्जित विद्या अभ्यास से सुरक्षित रहती है.
घर की इज्जत अच्छे व्यवहार से सुरक्षित रहती है.
अच्छे गुणों से इज्जतदार आदमी को मान मिलता है.
किसीभी व्यक्ति का गुस्सा उसकी आँखों में दिखता है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 9 : धर्मं की रक्षा पैसे से होती है.
ज्ञान की रक्षा जमकर आजमाने से होती है.
राजा से रक्षा उसकी बात मानने से होती है.
घर की रक्षा एक दक्ष गृहिणी से होती है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 10 : जो वैदिक ज्ञान की निंदा करते है, शास्र्त सम्मत जीवनशैली की मजाक उड़ाते है, शांतीपूर्ण स्वभाव के लोगो की मजाक उड़ाते है, बिना किसी आवश्यकता के दुःख को प्राप्त होते है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 11 : दान गरीबी को ख़त्म करता है. अच्छा आचरण दुःख को मिटाता है. विवेक अज्ञान को नष्ट करता है. जानकारी भय को समाप्त करती है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 12 : वासना के समान दुष्कर कोई रोग नहीं. मोह के समान कोई शत्रु नहीं. क्रोध के समान अग्नि नहीं. स्वरुप ज्ञान के समान कोई बोध नहीं.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 13 : व्यक्ति अकेले ही पैदा होता है. अकेले ही मरता है. अपने कर्मो के शुभ अशुभ परिणाम अकेले ही भोगता है. अकेले ही नरक में जाता है या सदगति प्राप्त करता है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 14 : जिसने अपने स्वरुप को जान लिया उसके लिए स्वर्ग तो तिनके के समान है.

एक पराक्रमी योद्धा अपने जीवन को तुच्छ मानता है.

जिसने अपनी कामना को जीत लिया उसके लिए स्त्री भोग का विषय नहीं.

उसके लिए सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड तुच्छ है जिसके मन में कोई आसक्ति नहीं.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 15 : जब आप सफ़र पर जाते हो तो विद्यार्जन ही आपका मित्र है. घर में पत्नी मित्र है. बीमार होने पर दवा मित्र है. अर्जित पुण्य मृत्यु के बाद एकमात्र मित्र है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 16 : समुद्र में होने वाली वर्षा व्यर्थ है. जिसका पेट भरा हुआ है उसके लिए अन्न व्यर्थ है.

पैसे वाले आदमी के लिए भेट वस्तु का कोई अर्थ नहीं. दिन के समय जलता दिया व्यर्थ है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 17: वर्षा के जल के समान कोई जल नहीं. खुदकी शक्ति के समान कोई शक्ति नहीं. नेत्र ज्योति के समान कोई प्रकाश नहीं. अन्न से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 18: निर्धन को धन की कामना. पशु को वाणी की कामना. लोगो को स्वर्ग की कामना. देव लोगो को मुक्ति की कामना.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 19: सत्य की शक्ति ही इस दुनिया को धारण करती है. सत्य की शक्ति से ही सूर्य प्रकाशमान है, हवाए चलती है, सही में सब कुछ सत्य पर आश्रित है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 20: लक्ष्मी जो संपत्ति की देवता है, वह चंचला है. हमारी श्वास भी चंचला है.

हम कितना समय जियेंगे इसका कोई ठिकाना नहीं.

हम कहा रहेंगे यह भी पक्का नहीं. कोई बात यहाँ पर पक्की है तो यह है की हमारा अर्जित पुण्य कितना है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 21: आदमियों में नाई सबसे धूर्त है. कौवा पक्षीयों में धूर्त है. लोमड़ी प्राणीयो में धूर्त है. औरतो में लम्पट औरत सबसे धूर्त है.

Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 22: ये सब आपके पिता है…

  1. जिसने आपको जन्म दिया.
  2. जिसने आपका यज्ञोपवित संस्कार किया.
  3. जिसने आपको पढाया.
  4. जिसने आपको भोजन दिया.
  5. जिसने आपको भयपूर्ण परिस्थितियों में बचाया.
Chanakya चाणक्य

चाणक्य नीति 23: इन सब को  आपनी माता समझें .

  1. राजा की पत्नी
  2. गुरु की पत्नी
  3. मित्र की पत्नी
  4. पत्नी की माँ
  5. आपकी माँ.
Chanakya चाणक्य

4 COMMENTS

  1. Hello Niraj ji
    Mujhe aapki is website ka template bahut badhiya laga hai
    1. Kya aap ye bata sakte hain ki aapki ye website blogger par hai ya WordPress par
    2. Aur iski theme paid hai ya free
    3. Aur theme ka naam kya hai

    Kya aap ye teeno baate batana chahenge ?

    • प्रिंस जी धन्यवाद अपना कीमती कमेंट देने के लिए…
      १. Helpहिन्दी वर्डप्रेस में हैं..
      २. थीम पेड हैं..
      ३. थीम का नाम newstube हैं….
      helpहिन्दी से जुड़े रहिये और सीखते रहिये सिखाते रहिये आगे बढतें रहिये…

  2. ये सब बताने के लिए आपका धन्यवाद नीरज जी ।
    नीरज जी आप चाणक्य नीति के ऊपर 7 chapter लिख चुके हैं ।
    आपने पोस्ट title में sixth chapter को 2 बार लिख दिया है ।
    जरा एक बार चेक कर लें ।
    धन्यवाद ।

  3. Prince ji ,कमेंट करने के लिए धन्यवाद ,हमारे पोस्ट title मे 7वां chapter ही लिखा है ,हमे लगता है आपको समझने मे कुछ दिक्कत हुई है ।राय देने के लिए धन्यवाद !!!!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here