संधर्ष जीवन में महत्वपूर्ण हैं | 3 struggle Life Story In Hindi

Hello friends…
Life में वैसे बोहुत सारी परेशानीयों का हमें सामना करना पड़ता हैं, कभी कभी तो गिरना पड़ता है तो कभी कभी रुकना पड़ता हैं, पर चाहें गिर जाएँ या रुक जाएँ हमें चलतें रहना चाहिए यही तो हैं असली जिंदगी का मज़ा और इसे ही कहें तो हम संधर्ष कह सकतें हैं, जैसें की आप किसी काम को अपने सच्चे दिल से कर रहें हैं पूरी मेहनत लगन के साथ रुकावटें बोहुत आयेगीं पर उस काम को आप करेंगे और आगे बढतें रहेंगे यही तो है संधर्ष, जैसे कुछ लोगों का यह कहना होता हैं की पैसे होंगे तो कुछ करेंगे, और में मानता हु की हम कुच करेंगें तो पैसे आयेंगें न, उसके लिए हमें संधर्ष करना पड़ें अपनि पूरी ताकात लगनी पड़े तो ये जरुरी हैं, क्यों की मेहनत संधर्ष और सच्ची लगन से ही इंसान सफलता की और जाता हैं, दोस्तों हम आज आपको 3ऐसी कहानी सुननें जा रहें हैं जिसें काफी लोगों ने पसंद किया, जिसें पढ़ कर काफी लोगों ने अपनी लाइफ़ बदली और आगे बढ़ें, ये उन महान लोगों की कहानी है जिन्होंने अपनी जिंदगी में सफल होनें के लिए Struggle की परेशानी जेली फिर भी दतें रहें अपने काम में और सिर्फ ध्यान दिया अपने लक्ष्य की और And आज वो सफ़ल इन्सानों में मानें जातें हैं..

सबसें बड़ा संधर्ष – The Student struggle Life

कहा जाता है कि अगर इंसान में संघर्ष और कठिन मेहनत करने की क्षमता हो तो दुनिया में ऐसा कोई मुकाम नहीं है जिसे हासिल ना किया जा सके । कवि रामधारी सिंह दिनकर ने सही ही कहा है कि “मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है”। ये कथन कानपुर के रहने वाले अभिषेक पे बिल्कुल सही बैठता है । सोना तपकर ही कुंदन बनता है और इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने अपना जीवन अभावों में गुजारा है वही लोग आगे चलकर सफलता को हासिल करते हैं ।

कोई भी माँ बाप कितने भी गरीब हों पर सबका सपना होता है कि उनका बच्चा खूब पढ़ाई करे । ऐसी ही एक बहुत गरीब परिवार की कहानी है जो दिल को छूते हुए गहरे सन्देश छोड़ती है।

कानपुर के रहने वाले अभिषेक कुमार भारती ने 2010 में भारत के सबसे कठिन इंजीनियरिंग परीक्षा IIT -JEE को पास किया जो अपने आप में एक अद्भुत उपलब्धि है । अभिषेक के पिता राजेन्द्र प्रसाद एक जूता सिलने वाले मोची हैं ,ये सुनने में जरूर अजीब लगेगा लेकिन सत्य है और माँ घर में लोगों के फटे कपड़े सिलकर कुछ पैसे इकट्ठे करती हैं । परिवार की रोज की दैनिक आमदनी मुश्किल से 150 रुपये है जिसमें परिवार का खर्चा चलना बहुत ही मुश्किल है । और घर के नाम पर एक छोटा सा कमरा है ।

कई बार अभिषेक खुद पिता की अनुपस्थिति में जूतों की सिलाई करता था । कभी कुछ पैसे कमाने के लिए नगरपालिका के कर्मचारियों के साथ काम भी करता था । लेकिन पढ़ने की चाह अभिषेक में शुरू से ही थी । वो रात भर जागकर पढाई करता । घर में बिजली कनेक्शन नहीं था तो लालटेन जला कर ही रात को पढाई करनी पढ़ती थी ।

अच्छी पढाई के लिए ना कोचिंग के पैसे थे और ना ही किताबें खरीदने के फिर भी अभिषेक जी जान से लगा रहता था । वो कभी हार ना मानने वाले लोगों में से था, अपने दोस्तों से पुरानी किताबें लेकर पढाई किया करता था । उसकी लगन के आगे आखिर किस्मत को झुकना ही पड़ा और अभिषेक ने वो उपलब्धि हासिल की जिसका लाखों भारतीय छात्र सपना देखते हैं । आज अभिषेक IIT Kanpur में AEROSPACE Engineering की पढाई कर रहे हैं ।

श्रम + संधर्ष =सफलता – Labor-Struggle= success

बेकन ने कहा- जुगनू जब तक उडता रहता हैं तब तक उसमें प्रकाश बना रहता है। जब वह उडना बंद कर देता हैं तो अंधकार से घिर जाता है। ठीक यही बात श्रम struggle  करने और न करने वाले मनुष्यों पर भी लागू होती है। यदि मनुष्य struggle न करके खाली बैठा रहे तो धीरे-धीरे उसके सारे अवयव अपनी गति, शक्ति power, और ऊर्जा खोकर निष्क्रिय हो जाते है। वह फिर चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता।

निकम्मा व्यक्ति धरती
का बोझ होता हैं, पुरूषार्थी व्यक्ति ही पराक्रमी होता है। संसार की समस्त संपदाऐं कर्मवीरों व पुरूषार्थीयों का ही वरण करती है| कहा भी गया है- उद्यमेन ही सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैंः नही सुप्तस्य सिंहस्य प्रविषन्ति मुखे मृगाः।

बाबर ने अनेक बार भारत पर आक्रमण किया लेकिन वह हर बार असफल रहा । निराष, हताष व पर्वतीय गुफाओं में लेटा था। संहसा उसका ध्यान एक मकडी पर गया। वह बार-बार दिवार की छत पर जाने के लिए चढती पर गिर पडती किन्तु उसने साहस नहीं छोडा। अन्त में वह छत पर पहूंच गयी । बाबर की चेतना में सहसों बिजलियों का प्रकाश कोंध गया।

मकडी उसके लिए प्रेरणास्त्रोत inspiration बन गई थी । बाहर आकर उसने अपने सेनापतियों को पुकारा । और तुरन्त दुने उत्साह passion और आवेग के साथ इबा्रहिम लोधी पर आक्रमण किया। इतिहास history गवाह हैं कि बाबर का यह आक्रमण भारत में मुगल साम्राज्य के लिए नींव का पत्थर साबित हुआ। struggle एक अनमोल मंत्र हैं वह कभी खाली नहीं जाता। किन्तु कुछ लोग परिश्रम करते हैं तो जैसे रोते हुए। निराषा और हताषा में झुलते हुए किन्तु ऐसे लोग कभी सफलता और कर्म या सुख नहीं पा सकते ।

भ्रम का सुख उन्हें मिलता है जो हर काम को पर्व की तरह संपन्न करते है। श्रम को अपने जीवन का एक निष्चित नियम बना लेना चाहिए । जिस प्रकार समय पर नित्य सूर्योदय होता हैं, सूर्यास्त होता है। समय पर मौसम आते है, व समय पर बदल जाते है। ठीक इसी प्रकार हमें प्रत्येक कार्य को कितना समय देना है? और उस पर कितना श्रम करना है। यह सुनिष्चित कर लेना चाहिए ।

आलसी लोग सदा अपने भाग्य के उपर निर्भर रहने के कारण असफल रहते है। व अपनी हर सफलता की जिम्मेदारी अपने भाग्य के माथे मढ देते है। एक बार भी वे नही सोचते कि मनुष्य का सबसे बडा क्षत्रु और उसकी समस्त असफलताओं का जिम्मेदार उसके स्वयं का आलस्य है। भगवान राम व कृष्ण का जीवन श्रेष्ट श्रम का सर्वात्तम उदाहरण है। श्रम करने से तनमन की उत्फुल्लता और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। जितना भी हम श्रम करेंगे, हमारा अन्तर्मन उतना ही किसी गहरे आनन्द और संतोष के रस में भीग जायेगा।

Butterfly struggle

जीव विज्ञान के टीचर क्लास में बच्चों को पढ़ा रहे थे कि इल्ली (कोष में बंद तितली का छोटा बच्चा) कैसे एक तितली का पूर्ण रूप लेता है | उन्होनें बताया कि 2 घंटे बाद ये इल्ली अपने कोष से बाहर आने के लिए संघर्ष करेगी | और कोई भी उसकी मदद नहीं करेगा उसको खुद ही कोष से बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने देना|

सारे छात्र उत्सुक्ता से इंतजार करने लगे, ठीक 2 घंटे बाद तितली अपने कोष से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी, लेकिन उसे बहुत संघर्ष करना पड़ रहा था| एक छात्र को तितली पर दया आई और उसने अध्यापक की बात को नज़रअंदाज करते हुए उस तितली के बच्चे की मदद की और उसे कोष से बाहर निकाल दिया| लेकिन अचानक बाहर आते ही तितली ने दम तोड़ दिया |

टीचर जब कक्षा मे वापस आए और घटना के बारे में पता चला तो उन्होनें छात्रों को समझाया की तितली के बच्चे की मौत प्रकर्ति के नियम तोड़ने की वजह से हुई है | प्रकर्ति का नियम है की तितली का कोष से निकालने के लिए संघर्ष करना उसके पंखों और शरीर को मजबूत और सुद्ृन्ढ बनाता है | लेकिन छात्र की ग़लती की वजह से तितली मर गयी |

ठीक उसी तरह ये बात हम पर भी लागू होती है | बहुत सारे अभिभावक भावनावश अपने बच्चों को संघर्ष करने से बचाते हैं लेकिन वे ये नहीं जानते की ये संघर्ष ही बच्चों को मजबूत बनता|

तो मित्रों, संघर्ष इंसान को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनता है | जो लोग जीवन में struggle नहीं करते उनके हाथ सिर्फ़ विफलता ही लगती है| अक्सर हमारे परिवार और माहौल में देखा जाता है कि जब बच्चे अपने जीवन में संघर्ष करते हैं तो माता पिता को बहुत दुःख होता है। माता पिता को डर लगता है कि कहीं संघर्ष की वजह से बच्चे को कोई तकलीफ ना झेलनी पड़े। लेकिन यही संघर्ष बच्चों के इरादे को मजबूत बनाता है। उन्हें जीवन का नया अनुभव देता है। उनके आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है।

हमें उमीद हैं की आपको ये 3कहानी पसंद आई  होगी ओर आपने सिख लिया की लाइफ में कुछ पानें के लिए संघर्ष बोहुत जरुरी है यह प्रकृति का नियम हैं… तो दोस्तों इस कहानी को अपने दोस्तों तक जरुर पोहुचएं और आगे बढतें  रहें

best of luck….

 

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