सोच समज कर बोलों – शिक्षाप्रद कहानि

हमारी Life में ऐसे कही बार होता हैं हम बिना कुछ जाने बिना कुछ समजे किसी को भी कुछ भी बोल देतें हैं चाहे वो अच्छा हो या बुरा हम बोल देतें हैं फिर बोलने के बाद हमें उस बात के लिए काफी अफ़सोस होता हैं, और वो हमारे maid में बार बार घुमती रहती हैं, आज हम आपके साथ एक एक ऐसी story share करने जा रहें अगर आपने उसमे से मिलने वाली सिख को वाकेही अपने life में गांठ बना लिया तो आपकी लाइफ में आप कभी भी खुद पर सर्मिंदगी महसूस नहीं करेंगे…..

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा.

संत ने किसान से कहा , ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर  के बीचो-बीच जाकर रख दो .” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया.

तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ”

किसान वापस गया पर तब  तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे. और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा. तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है,तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते.

कहानी की सिख :- दोस्तों कुछ भी कडवा बोलने से पहले या फिर कुछ भी बोलने से पहेले इस कहानी को जरुर याद करना की Life में आप जो कुछ बोलेंगे वो फिरसे नहीं आनें वाला, And इतना याद रखिये की वापस लानें के लिए आज तक कुछ बना नहीं हैं तो सबसे बेहतर रस्ता हैं की जहा बोलने की जरूरत है वहा आप बोलिए या फिर चुप रहनें में फायदा हैं क्यों की किसी को दुःख दे कर आपको तो दो पल की खुसी मिल जाएगी फिर आप अगर महसूस करेंगे तो आप खुद से ही नफरत कर लेंगे… SO FRIENDS आप कभी ऐसी गलती न करें….

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