Osho Biography In Hindi |ओशो :जीवन परिचय ,facts ,Principle

चलिए आज हम osho ki life story , biograpphy  पर बात कर रहे हैं ,चलिए जानते हैं –

Osho kaun hai-

बहुत से लोग osho का नाम तो सुना है ,लेकिन ओशो के बारे में ज्यादा जानते नही |ओशो आध्यात्मिक गुरु थे ,जो विवादों में रहे |ओशो का विवादों से , रहस्यों से ही नाता रहा है ,ओशो न सिर्फ भारत में , बल्कि अमेरिका में भी रहे और लोगो को आध्यात्मिक दर्शन कराया |ओशो अपने आप को “अमीरों का गुरु” बताते थे | एक interview में osho ने ये बताया कि गरीबो के तो बहुत गुरु है तुम मुझे अमीरों का बनने दो |

 

ओशो का जीवन परिचय –

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ओशो का जन्म 11 जनवरी 1931 को मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन शहर के कुच्वाडा गांव में हुआ |ओशो शब्द लैटिन भाषा के शब्द ओशोनिक से लिया गया है, जिसका अर्थ है सागर में विलीन हो जाना।ओशो के बचपन का नाम चन्द्र मोहन जैन था ,जोकि बाद में ओशो के नाम से प्रसिद्ध हुए | ओशो के पिता की 11 संतान थी जिसमे ओशो सबसे बड़े थे |7साल की उम्र तक वे अपने नाना के यहाँ रहे ,नाना के देहांत के बाद ओशो अपने माता – पिता के साथ गाडरवाडा में रहने लगे | ओशो के पिता कपडे के व्यवसायी थे | ओशो काफी धनी परिवार से थे , और उनके पास 1400 एकड़ जमीन थी ,जिस पर खेती की जाती थी |

1780 तक आचार्य रजनीश मुंबई में रुके और अपने शिष्यों को नव संन्यास में दीक्षित किया |इसके बाद वे पूना गये जहाँ पर उनके विदेशी शिष्यों की संख्या लगातार बढती रही और इसके बाद 1980 में ओशो अमेरिका चले गये और वहीँ रजनीशपुरम की स्थापना की |

ओशो ने 600 से भी ज्यादा पुस्तके लिखी है |ओशो कुशल वक्ता थे , जिसकी वजह से उन्होंने अपने लाखो समर्थक बनाये | संभोग से समाधि की ओर इनकी सबसे चर्चित और विवादास्पद पुस्तक है।

 

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ओशो के सिद्धांत (Principle of Osho in hindi ) –

  • सबसे बडा रोग क्या कहेंगे लोग।
  • कभी किसी की आज्ञा का पालन नहीं करे, जब तक के वो आपके भीतर से भी नहीं आ रही हो।
  • जन्म ही नहीं मृत्यु का भी उत्सव मनाओ |
  • अन्य कोई ईश्वर नहीं हैं, सिवाय स्वयं जीवन (अस्तित्व) के।
  • सत्य आपके अन्दर ही है, उसे बाहर ढूंढने की जरुरत नहीं है।
  • प्रेम ही प्रार्थना हैं।
  • शून्य हो जाना ही सत्य का मार्ग है। शून्य हो जाना ही स्वयं में उपलब्धि है।
  • जीवन यहीं अभी हैं।
  • जीवन होश से जियो।
  • सत्य का एकमात्र द्वार है भीतर की ओर खुलता है, एक बार खुल जाए तो निरंतर साथ रहता है, सत्य का और कोई द्वार होता ही नहीं।
  • तैरो मत – बहो।
  • प्रत्येक पल मरो ताकि तुम हर क्षण नवीन हो सको।
  • उसे ढूंढने की जरुरत नहीं जो कि यही हैं, रुको और देखो।
  • मैं धर्म नहीं धार्मिकता सिखाता हूं।
  • यहां से गुजरा सोचा सलाम करता चलूं।

ओशो कहते हैं, ‘मेरा जीवन ऐसा ही है कि अगर मैं अपने जीवन के बारे में बात करता हूं, तो उसका न तो आदि है और न ही अंत है। मेरे जीवन में आरंभ और अंत होगा ही नहीं। जैसे-जैसे मैंने विकसित होना आरंभ किया और मैं विकसित होता रहा हूं। मैं बूढ़ा नहीं हुआ। अपने जन्म से मैं विकसित हुआ हूं। ऐसा कभी मत सोचना कि मेरी आयु बढ़ रही है। केवल मूढ़ों की आयु बढ़ती है। अन्य प्रत्येक का विकास होता है।’

 

Interesting Fact About Osho in Hindi

  • ओशो पैदा होने के 3 दिन बाद तक ना ही रोये और ना ही हँसे |
  • १२ साल की उम्र में वे एक बार शमशान चले गये केवल यह पता लगाने के लिए की आदमी मरने बाद आखिर कहाँ जाता है |
  • सन्यास लेते समय पिता उनके पैर पकड कर रोये |
  • बचपन में ओशो ने एक बार यह जिद पकड ली की उन्हें हाथी पर बैठ कर जाना है जिसकी वजह से उनके पिता ने उन्हें हाथी पर स्कूल भेजा |
  • ओशो अमीरों के गुरु थे
  • ओशो का दिमाग इतना sharp था की वे एक दिन में 3 किताबे पढ़ जाते थे |
  • ओशो यह चाहते थे कि उनके पास 365 Royal कार हो जिससे वह Perday new कार का इस्तेमाल करे ,एक समय ऐसा भी हुआ की ओशो के शिष्यों ने उन्हें लगभग 90 रॉयल cars दी |
  • ओशो अपने पूर्व जन्म के बारे में बताते हुए यह कहते हैं कि पूर्व जन्म में उनका जन्म तिब्बत में हुआ था |
  • ओशो घर में ग्यारह भाई-बहन थे, जिसमें ओशो ही थे जो अपनी मां को भाभी कहते थे तथा अपनी नानी को मां कहकर पुकारते थे।
  • ‘’महासागर की पुकार ओशो का कहना था कि ओठों से कहोगे, बात थोथी और झूठी हो जाएगी। प्राणों से कहनी होगी। और जहां आनंद है, वहां प्रेम है और जहां प्रेम है वहां परमात्मा है।‘’

 

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