जैसी करनी वैसी भरनी – 3 Law Of Karma Story

नमस्कार मित्रों..

वैसे तो Law Of karma के बारें में आप सभी बोहुत ही अच्छी तरह से जानतें हैं, Law Of karma यानि जैसा हम करतें हैं उसका फल वैसा ही हमें मिलता हैं, फिर चाहें वो हमने अच्छा किया हो या बुरा But उसका फल तो हमें मिलता हैं, अगर हमने कुछ अच्छा काम किया हैं तो उसका फल हमें अच्छा ही मिलेगा, अगर हमने किसी के साथ या खुद के साथ कुछ बुरा किया तो उसका नतीजा भी बुरा होगा,यानि हम जो कुछ करते हैं उसका फल हमें इसी लाइफ में मिल जाता हैं, तो दोस्तों आज आपके साथ कुछ ऐसी कहानी शेर करने वालें हैं जो सही में आपको एक अलग अहसास दिलाएगी, क्यों ? क्योकि यहाँ जो कहानी हैं उसको पढने के बाद आपको भरोशा हो जायेगा की Yes की जो कुछ भी हमारी Life में हुवा या हो रहा हैं या आगे जा कर जो कुछ होगा वो हमारें ही कर्मो का फल हैं, और वो हमें मिलेगा ही मिलेगा, वैसे लोग ये कहतें है की ऊपर वाला हैं जो हमारी किस्मत लिखता हैं But Just Think About it की अगर ऊपर वाला किस्मत लिखता तो हामरी life में कुछ बुरा क्यों होता, सब अच्छा ही होता ना anyway ये सब एक अलग टॉपिक पर हैं , उसके बारें में आगे बात करेंगे फ़िलहाल आज जो आपके साथ स्टोरी शेर कर रहें हैं उससे इतना तो कांफोर्म हो जायेगा की हम अपनी किस्मत खुद लिखतें हैं और उसी का फल हमें मिलता हैं…

मेंढक और चूहा 

एक बार की बात है कि एक चूहे और मेंढक में गहरी दोस्ती थी| उन दोनों ने जीवन भर एक दूसरे से मित्रता निभाने का वादा किया लेकिन चूहा तो ज़मीन पर रहता था और मेंढक पानी में| उन्होनें एक दूसरे के साथ रहने की एक तरकीब निकाली| दोनों ने एक रस्सी से खुद को बाँध लिया ताकि हर जगह हम एक साथ जाएँगे और सारे सुख दुख एक साथ भोगेंगे |

जब तक दोनों ज़मीन पर रहे तब तक तो सब कुछ अच्छा चल रहा था अचानक मेंढक को एक शरारत सूझी और उसने पास के ही एक तालाब मे छलाँग लगा दी| बस फिर क्या था रस्सी से बँधे होने के कारण चूहा भी पानी में गिर गया| अब चूहा बहुत परेशान था वह डूब रहा था और बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था| लेकिन मेंढक धूर्त था उसने अपने मित्र चूहे को नज़रअंदाज़ करते हुए टरटरते हुए ज़ोर ज़ोर से तैरना शुरू कर दिया|

अब तो चूहे की जान ही निकल गयी वह बड़ी मुश्किल से मेंढक को तालाब के किनारे तक खींच कर लाया|

जैसे ही दोनों ने ज़मीन पर पैर रखा अचानक एक चील आई और चूहे को झपट कर उड़ने लगी अब रस्सी से बँधे होने के कारण मेढक भी पंजे में आ गया उसने छूटने का बहुत प्रयास किया लेकिन रस्सी को तोड़ ना सका और अंत में दोनों को चील ने खा लिया| अब तो चूहे के साथ मेंढक भी बेमौत मारा गया|

इसीलिए कहा जाता है की जो लोग दूसरों का बुरा करते हैं उसके साथ वह भी गड्ढे में गिरते हैं, तो जैसी करनी वैसी भरनी|

व्यापारी पुत्र और सेठ

किसी नगर में एक व्यापारी का पुत्र रहता था। दुर्भाग्य से उसकी सारी संपत्ति समाप्त हो गई। इसलिए उसने सोचा कि किसी दूसरे देश में जाकर व्यापार किया जाए। उसके पास एक भारी और मूल्यवान तराजू था। उसका वजन बीस किलो था। उसने अपने तराजू को एक सेठ के पास धरोहर रख दिया और व्यापार करने दूसरे देश चला गया।

कई देशों में घूमकर उसने व्यापार किया और खूब धन कमाकर वह घर वापस लौटा। एक दिन उसने सेठ से अपना तराजू माँगा। सेठ बेईमानी पर उतर गया। वह बोला, ‘भाई तुम्हारे तराजू को तो चूहे खा गए।’ व्यापारी पुत्र ने मन-ही-मन कुछ सोचा और सेठ से बोला-‘सेठ जी, जब चूहे तराजू को खा गए तो आप कर भी क्या कर सकते हैं! मैं नदी में स्नान करने जा रहा हूँ। यदि आप अपने पुत्र को मेरे साथ नदी तक भेज दें तो बड़ी कृपा होगी।’

सेठ मन-ही-मन भयभीत था कि व्यापारी का पुत्र उस पर चोरी का आरोप न लगा दे। उसने आसानी से बात बनते न देखी तो अपने पुत्र को उसके साथ भेज दिया।स्नान करने के बाद व्यापारी के पुत्र ने लड़के को एक गुफ़ा में छिपा दिया। उसने गुफा का द्वार चट्टान से बंद कर दिया और अकेला ही सेठ के पास लौट आया।

सेठ ने पूछा, ‘मेरा बेटा कहाँ रह गया?’ इस पर व्यापारी के पुत्र ने उत्तर दिया,‘जब हम नदी किनारे बैठे थे तो एक बड़ा सा बाज आया और झपट्टा मारकर आपके पुत्र को उठाकर ले गया।’ सेठ क्रोध से भर गया। उसने शोर मचाते हुए कहा-‘तुम झूठे और मक्कार हो। कोई बाज इतने बड़े लड़के को उठाकर कैसे ले जा सकता है? तुम मेरे पुत्र को वापस ले आओ नहीं तो मैं राजा से तुम्हारी शिकायत करुँगा’ व्यापारी पुत्र ने कहा, ‘आप ठीक कहते हैं।’ दोनों न्याय पाने के लिए राजदरबार में पहुँचे।

सेठ ने व्यापारी के पुत्र पर अपने पुत्र के अपहरण का आरोप लगाया। न्यायाधीश ने कहा, ‘तुम सेठ के बेटे को वापस कर दो।’ इस पर व्यापारी के पुत्र ने कहा कि ‘मैं नदी के तट पर बैठा हुआ था कि एक बड़ा-सा बाज झपटा और सेठ के लड़के को पंजों में दबाकर उड़ गया। मैं उसे कहाँ से वापस कर दूँ?’ न्यायाधीश ने कहा, ‘तुम झूठ बोलते हो। एक बाज पक्षी इतने बड़े लड़के को कैसे उठाकर ले जा सकता है?’

इस पर व्यापारी के पुत्र ने कहा, ‘यदि बीस किलो भार की मेरी लोहे की तराजू को साधारण चूहे खाकर पचा सकते हैं तो बाज पक्षी भी सेठ के लड़के को उठाकर ले जा सकता है।’ न्यायाधीश ने सेठ से पूछा, ‘यह सब क्या मामला है?’ अंततः सेठ ने स्वयं सारी बात राजदरबार में उगल दी। न्यायाधीश ने व्यापारी के पुत्र को उसका तराजू दिलवा दिया और सेठ का पुत्र उसे वापस मिल गया।

जैसा देंगे वैसा पायेंगें

एक़ बार क़ी बात हैं किसी गांव में एक़ किसान था जो क़ी दुध से दहीं और मख्खन बना-क़र उसे बेचकर घर चलाता था एक़ दिन उसकी पत्नी ने उसे मख्खन तैय्यार क़र के दिया वो उसे बेंचने के लिये अपने गांव से शहर क़ी तरफ़ रवाना हो गया..

वो मख्खन गोल-मोल पेढ़ो क़ी शकल् में बना हुआ था और हर पेढ़े का वजन एक़ Kilogram था |
शहर में किसान ने उस मख्खन क़ो रोज़ क़ी तरह एक़ दूकानदार क़ो बैच दिया, और दूकानदार से चायपत्ति, चिनी, रसोई का तेल और साबून वगैरह ख़रीदकर वापस अपने गांव जाने के लिये रवाना हो गया,

उस किसान के जाने के बाद उस दूकानदार ने मख्खन क़ो Freezer में रखना शुरू किया और उसे अचानक ख़याल आया क़ी क्यों ना इनमें से एक़ पेढ़े का वजन चेक किया जाए, वजन तोलने पर पेढ़ा सिर्फ़ 900 Gram. का निकला,

हेरत और निराषा से उसने सारें पेढ़े तोल डालें मग़र किसान के लाए हुए सभि पेढ़े 900-900 Gram.के हि निकलें।

ठीक अगले हफ़्ते फ़िर किसान हमेषा क़ी तरह मख्खन लेकर जैसे ही दूकानदार क़ी दहलीज पर चढा
दूकानदार ने किसान से चिल्लाते हुए कहा, – तू दफा हो जा यहाँ से, किसी बेइमान और धोखेबाज शख़्स से क़ारोबार करना, पर मूझसे नहीं।

900 Gram. मख्खन को पूरा एक़ किलो 1.KG कह-क़र बेचने वाले शख़्स क़ी वो शक़्ल भी देखना गवारा नहीं करता |

किसान ने बडी ही आजिज़ी (विनम्रता) से दूकानदार से कहा “मे्रे भाई मूझसे बद-ज़न ना हो हम तो ग़रीब और बेचारे लोग है,

हमारी पास माल तोलने के लिए बाट (वजन) ख़रीदने की हेसियत कहां” आपसे जो एक़ किलो चिनी लेकर जाता हूं उसी क़ो तराज़ू के एक़ पलडें मे रख-क़र दुसरें पलडें मे उतने ही वजन का मख्खन तोलकर ले आता हूं।

जो हम दूसरों को देंगे,

वहिं लौट क़र आयेगा…

फ़िर चाहे वो ईज्जत, सम्मान हो,

या फ़िर धोखा…….!!!

संसार का नियम यही हैं

दोस्तों आपको यह कहानियाँ कैसी लगी कृप्या हमें कमेंट से जरुर कहिएं… अपने दोस्तों से जरुर शेर किजीयें… और Helpहिन्दी से जुड़ें रहियें…

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