Swami Vivekanand quotes in hindi | स्वामी विवेकानंद जी के उद्धरण

स्वामी विवेकानंद के विचार ,उद्धरण यहाँ पर प्रस्तुत किये जा रहे हैं ……..

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1- एक विचार लो, उस  विचार  को  अपना जीवन  बना  लो | उसके  बारे  में  सोचो  उसके  सपने  देखो , उस  विचार  को  जियो | अपने  मस्तिष्क, मांसपेशियों , नसों , शरीर  के  हर  हिस्से  को  उस विचार में  डूब  जाने  दो , और  बाकी  सभी विचार  को  किनारे  रख  दो |यही सफल  होने  का तरीका  है|

  • स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

    2-एक समय में एक काम करो , और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ |

  • स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

3-जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे . यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो , तुम कमजोर हो जाओगे | अगर खुद को ताकतवर सोचते हो , तुम ताकतवर हो जाओगे |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

4-यह भगवान से प्रेम का बंधन वास्तव में ऐसा है जो आत्मा को बांधता नहीं है बल्कि प्रभावी ढंग से उसके सारे बंधन तोड़ देता है|

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

5-सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

6-किसी  दिन , जब  आपके  सामने  कोई   समस्या  ना  आये  , आप  सुनिश्चित  हो  सकते  हैं  कि  आप  गलत  मार्ग  पर  चल  रहे  हैं |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

7-तुम फ़ुटबाल के जरिये स्वर्ग के ज्यादा निकट होगे बजाय गीता का अध्ययन करने के  |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

8-यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढाया और अभ्यास कराया गया होता , तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

9-जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

10-उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो , तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो , तुम तत्व नहीं हो , ना ही शरीर हो , तत्व तुम्हारा सेवक है|

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11-उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये |

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12-कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है. ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है. अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल  हो या अन्य निर्बल हैं|

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13-हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं|

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

14-सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा |

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15-प्रेम  विस्तार  है , स्वार्थ  संकुचन  है . इसलिए  प्रेम  जीवन  का  सिद्धांत  है . वह  जो  प्रेम  करता  है  जीता  है , वह  जो  स्वार्थी  है  मर  रहा  है .   इसलिए  प्रेम  के  लिए  प्रेम  करो , क्योंकि  जीने  का  यही  एक  मात्र  सिद्धांत  है , वैसे  ही  जैसे  कि  तुम  जीने  के  लिए  सांस  लेते  हो |

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16-जो  तुम  सोचते  हो  वो  हो  जाओगे . यदि तुम  खुद  को  कमजोर  सोचते  हो , तुम  कमजोर  हो  जाओगे ; अगर  खुद  को  ताकतवर  सोचते  हो , तुम  ताकतवर  हो  जाओगे |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

17-किसी की निंदा ना करें: अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं. अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

18-हम जो बोते हैं वो काटते हैं . हम स्वयं अपने भाग्य के विधाता हैं . हवा बह रही है ; वो जहाज जिनके पाल खुले हैं , इससे टकराते हैं , और अपनी दिशा में आगे बढ़ते हैं |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

19-हमे लोहे के पुट्ठे और इस्पात की स्नायु चाहिए ,जिनमे वज्र सा मन निवास करे |

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20- बस  वही  जीते  हैं,जो  दूसरों  के  लिए  जीते  हैं |

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21-जिस  क्षण  मैंने  यह  जान  लिया  कि  भगवान  हर एक  मानव  शरीर  रुपी  मंदिर  में  विराजमान  हैं , जिस  क्षण  मैं  हर  व्यक्ति  के  सामने  श्रद्धा  से  खड़ा  हो  गया  और  उसके  भीतर  भगवान  को  देखने  लगा – उसी  क्षण  मैं  बन्धनों  से  मुक्त   हूँ , हर  वो  चीज  जो  बांधती  है  नष्ट   हो  गयी , और मैं  स्वतंत्र  हूँ |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

22-एक  समय  में  एक  काम  करो , और  ऐसा  करते  समय  अपनी  पूरी  आत्मा  उसमे  डाल  दो  और  बाकी  सब  कुछ  भूल  जाओ |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

23-हम  जो  बोते  हैं  वो  काटते  हैं . हम  स्वयं  अपने  भाग्य   के  विधाता  हैं . हवा  बह  रही  है ; वो  जहाज  जिनके  पाल  खुले  हैं , इससे टकराते  हैं , और  अपनी  दिशा  में  आगे  बढ़ते  हैं , पर  जिनके  पाल  बंधे  हैं हवा  को  नहीं  पकड़  पाते . क्या  यह  हवा  की  गलती  है ? हम अपना  भाग्य खुद बनाते  हैं |

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24-कुछ  मत  पूछो , बदले  में  कुछ  मत  मांगो . जो  देना  है  वो  दो ; वो  तुम  तक  वापस  आएगा , पर  उसके  बारे  में  अभी  मत  सोचो |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

25-मस्तिष्क   की  शक्तियां  सूर्य  की  किरणों  के  समान  हैं . जब  वो  केन्द्रित  होती  हैं, चमक  उठती  हैं |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

26-कुछ  सच्चे , इमानदार  और  उर्जावान  पुरुष  और  महिलाएं,  जितना  कोई  भीड़  एक  सदी  में  कर  सकती  है  उससे  अधिक  एक  वर्ष  में  कर  सकते  हैं |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

27-जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक  जाता है|

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28-यदि  स्वयं  में  विश्वास  करना  और  अधिक  विस्तार  से  पढाया  और  अभ्यास  कराया  गया  होता, तो  मुझे  यकीन  है  कि  बुराइयों  और  दुःख  का  एक  बहुत  बड़ा  हिस्सा  गायब  हो  गया होता |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

29-एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं |

स्वामी विवेकानंद [SWAMI VIVEKANAND]

30-वेदान्त  कोई  पाप  नहीं  जानता , वो  केवल  त्रुटी  जानता  है . और  वेदान्त  कहता  है  कि  सबसे  बड़ी  त्रुटी  यह कहना  है  कि तुम  कमजोर  हो , तुम  पापी  हो , एक  तुच्छ  प्राणी  हो , और  तुम्हारे  पास  कोई  शक्ति  नहीं  है  और  तुम  ये  वो  नहीं  कर  सकते |

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31-शक्ति  जीवन  है ,निर्बलता  मृत्यु  है .

 विस्तार  जीवन  है ,संकुचन  मृत्यु  है ,

प्रेम  जीवन  है , द्वेष  मृत्यु  है |

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32-ब्रह्माण्ड कि सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं. वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है|

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33-अगर धन दूसरों की भलाई  करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है|

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34-उस व्यक्ति ने अमरत्व  प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता |

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35-दिल  और  दिमाग  के  टकराव  में  दिल  की  सुनो |

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